गुलाब का फूल-अगर पानी में घिसकर किसी को पिलाया जाय तो उसे सात रोज तक किसी तरह की बेहोशी असर न करेगी।
मोतिये का फूल-अगर पानी में थोड़ा-सा घिसकर किसी कुएं में डाल दिया जाय तो चार पहर तक उस कुएं का पानी बेहोशी का काम देगा, जो पियेगा बेहोश हो जायगा, इसकी बेहोशी आधा घंटे बाद चढ़ेगी।
दो ही फूलों के गुण पढ़े थे कि तीनों ऐयार मारे खुशी के उछल पड़े, कुमार ने किताब बंद कर दी और कहा, ''बस अब न पढ़ेंगे।''
अब तेजसिंह हाथ जोड़ रहे हैं, कसमें देते जाते हैं कि किसी तरह परमेश्वर के वास्ते पढ़िये, आखिर यह सब आप ही के काम आवेगा, हम लोग आप ही के तो ताबेदार हैं। थोड़ी देर तक दिल्लगी करके कुमार ने फिर पढ़ना शुरू किया-
ओरहुर का फूल-पानी में घिसकर पीने से चार रोज तक भूख न लगे।
कनेर का फूल-पानी में घिसकर पैर धो ले तो थकावट या राह चलने की सुस्ती निकल जाय।
गुलदावदी का फूल-पानी में घिसकर आंखों में अंजन करे तो अंधेरे में दिखाई दे।
केवड़े का फूल-तेल में घिसकर लगावे तो सर्दी असर न करे, कत्थे के पानी में घिसकर किसी को पिलाए तो सात रोज तक किसी किस्म का जोश उसके बदन में बाकी न रहे।
इन फूलों को बड़ी खुशी से तेजसिंह ने अपने बटुए में डाल लिया, देवीसिंह और ज्योतिषीजी मांगते ही रहे मगर देखने को भी न दिया।
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